बहरे_रमल_मुसद्दस_महजूफ
अर्कानफाइलातुन,फाइलातुन,फाइलुनवज़्न2122, 2122, 212
फिल्मी गीत*तुम न जाने किस जहां में खो गये |
*दिल के अरमां आंसूओं में बह गये |
*हर जगह दुश्मन ज़माना गम नहीं |
*इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल |
गज़ल
बहरे-रमल मुसद्दस महज़ूफ
2122 2122 212
क्वाफि आना स्वर
रदीफ़ आ गया
🌹
ख्वाब आँखों में सजाना आ गया
फूल बागों में खिलाना आ गया।
🌹
हो गई श्रृंगार अब ये जिंदगी
गीत रागों में बनाना आ गया।
🌹
था कहीं भटका हुआ सा राह में
इश्क में मेरा ठिकाना आ गया
🌹
है लगी बनने कहानी प्यार की
प्रेम बातों में जताना आ गया
🌹
हो रही है अब मुकम्मल शाइरी।
शेर महफ़िल में सुनाना आ गया
🌹
साथ तेरा क्या मिला ए जिंदगी
जी रहा हूँ ये बताना आ गया।
🌹
ना करो अविराज बातें यूँ बड़ी
प्यार को दिल में छुपाना आ गया।
✍अरविन्द चास्टा "अविराज"कपासन ,चित्तौरगढ़ ,राज.
फिल्मी गीत
*तुम न जाने किस जहां में खो गये |
*दिल के अरमां आंसूओं में बह गये |
*हर जगह दुश्मन ज़माना गम नहीं |
*इक दिन बिक जाएगा माटी के मोल |
बहरे-रमल मुसद्दस महज़ूफ
2122 2122 212
क्वाफि आना स्वर
रदीफ़ आ गया
🌹
ख्वाब आँखों में सजाना आ गया
फूल बागों में खिलाना आ गया।
🌹
हो गई श्रृंगार अब ये जिंदगी
गीत रागों में बनाना आ गया।
🌹
था कहीं भटका हुआ सा राह में
इश्क में मेरा ठिकाना आ गया
🌹
है लगी बनने कहानी प्यार की
प्रेम बातों में जताना आ गया
🌹
हो रही है अब मुकम्मल शाइरी।
शेर महफ़िल में सुनाना आ गया
🌹
साथ तेरा क्या मिला ए जिंदगी
जी रहा हूँ ये बताना आ गया।
🌹
ना करो अविराज बातें यूँ बड़ी
प्यार को दिल में छुपाना आ गया।
✍अरविन्द चास्टा "अविराज"
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