Sunday, June 14, 2026

बह्रे- मुतक़ारिब मुसम्मन मक़्सूर

बह्र ए ख़फीफ :मुसद्दस मख़बून महजूफ मक्तूअ

अर्कान:
फाइलातुन,मुफाइलुन,फैलुन/फइलुन

वज़्न:
 2122,1212,22/112

इसी बह्र पर कुछ फिल्मी गीत

1. फिर छिड़ी रात बात फूलों की

2. तेरे दर पे सनम चले आये

3. आप जिनके करीब होते हैं

4. यूँ ही तुम मुझसे बात करती हो,

5. मेरी किस्मत में तू नहीं शायद

6. आज फिर जीने की तमन्ना है

7. ये मुलाकात इक बहाना है


बह्र ए ख़फीफ :मुसद्दस मख़बून महजूफ मक्तूअ


अर्कान:फाइलातुन,मुफाइलुन,फैलुन/फइलुन


वज़्न: 2122,1212,22/112



#गज़ल-
इश्क उनको सजा सुनाता है,
इश्क जिनको गले लगाता हे।
*
खत्म कर दे कभी वफ़ा दिल से,
यार हर बार याद आता है।
*
पूछ मत आलमे वफ़ा मुझसे,
चाँद हर रात यूँ सताता है।
*
गुलशनों में बहार क्या देखूं,
हुस्न नाजों पला बुलाता है।
*
मयकदे में बुला चले जाना
आशिकों को बड़ा सताता है।
*
आज "अविराज" क्या कहूँ तुमको
इश्क सब को यहाँ मिलाता है।
........
अरविन्द चास्टा "अविराज "
कपासन ,चित्तौरगढ़ ,राज.

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