Sunday, June 14, 2026

तांका जापानी कविता

इसे हाइकु की जन्मदात्री शैली 
कहा जाता है ।
 ये 7 पंक्तियों में लिखी जाती है ,
 इसमें क्रमशः
 5+7+5+7+7= 31 
वर्ण का विधान है ।
 विशेषता यह की प्रथम 3 पंक्तियो की
 पूर्णता को अंतिम 2 पंक्तियों में
स्पष्ट किया जाता है।

 ये एक श्रृंखला की भाँति
 लिखी जाने वाली 
आकर्षक काव्यविधा है। 
अन्य शब्दों में कोई एक कवि
 हाइकु 5,7,5 लिखता है 
दूसरा उसे दो पंक्ति 7,7 में 
पूर्णता अथवा प्रत्युत्तर देता है । 

जब ये श्रृंखला आगे बढ़ती है
 तो इसे रेंगा कहा जाता है । 

लेकिन जब कोई एक ही
 कलमकार 5,7,5,7,7 
पर लिखता है 
उसे ताँका कहा जाता है। 
इसमें किसी विषय की 
बाध्यता नही होती है।
...

उदाहरण 

बसन्त आया,
खुशियां छा गई है,
नवपल्लव,
ऋतु का सरताज है
सर्वत्र उल्लास है।।

अरविन्द चास्टा "अविराज"
कपासन चित्तौड़गढ़ राज.


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