सायली
इसे कई महानुभाव सायली छंद भी कहते है पर सर्वमान्य नही ।
अपने भावों को शब्दों के निश्चित क्रम में प्रकट करने का माध्यम है ।यथासायली एक पाँच पंक्तियों और नौ शब्दों वाली कविता है |
उपलब्ध जानकारी के अनुसार मराठी कवि विशाल इंगळे ने इस विधा को विकसित किया हैं | अल्प समय में यह विधा मराठी काव्यजगत में लोकप्रिय हुई है।
हिंदी साहित्य के सृजनकर्ताओं ने इस विधा को अपने लेखन शैली में स्थान दिया है।
नियमपाँच पंक्तियों में लेखन का विधान कहा जाता है।विशेष की- मात्रा एवम् वर्ण के बजाय शब्दों की सँख्या को आधार माना है।
पहली पँक्ति में एक शब्ददुसरी पँक्ति में दो शब्दतीसरी पँक्ति में तीन शब्दचौथी पँक्ति में दो शब्दपाँचवी पँक्ति में एक शब्द
🍂सायली🍂*धरापीत वर्णीमद गन्ध महकीमोहती मनहवाएँ।🍂उमड़तेभावों कोथाम लो आकरबेचैन हुआमन।🍂पवनदिशा हीनलपेट रही मुझेआ गयावसन्त।🍂✍अरविन्द चास्टा "अविराज"कपासन चितोड़गढ़ राज.
🍂सायली🍂
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धरा
पीत वर्णी
मद गन्ध महकी
मोहती मन
हवाएँ।
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उमड़ते
भावों को
थाम लो आकर
बेचैन हुआ
मन।
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पवन
दिशा हीन
लपेट रही मुझे
आ गया
वसन्त।
🍂✍
अरविन्द चास्टा "अविराज"
कपासन चितोड़गढ़ राज.
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