बहरे मुतक़ारिब:मुसम्मन सालिम
अरकान: फऊलुन,फऊलुन,फऊलुन,फऊलुन
वज़न:-122 122 122 122
यह बहर बहुत लोकप्रिय बहर है इस बहर पर क़रीब हर गायक और गीतकार ने गीत या गज़लें लिख़कर या गाकर अपनी किसमत सँवारी और मशहूर हो गये क्यूँकि ये बहर है ही इतनी सहल और आसान जितने भी गीत फिल्मी दुनिया में इस पर लिखे जा चुके हैं उन्हें आज भी लोग एैसे ही गुनगुनाते हैं जैसे कल गुनगुनाते थे!इस बहर की लै या ताल आसानी से पकडने के लिए यहाँ कुछ फिल्मी गीत दिये जा रहे हैं
१*तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं ।२*वो जब याद आये बहुत याद आये।३*उठेगी तुम्हारी नज़र धीरे-धीरे ।४*इशारों-इशारों में दिल लेने वाले ।५*तुम्हें प्यार करते हैं करते रहेंगे ।६*अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो ।७*न तुम बे-वफ़ा हो न हम बे-वफ़ा है ।८*हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई९ *मुझे दुनिया वालों, शराबी न समझो१०*सितारों के आगे जहां और भी हैं ।११*ये महलों ये तख्तों ये ताजों की दुनियां१२*मुझे प्यार की ज़िंदगी देने वाले ।१३*मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोए ।१४*संभाला है मैंने बहुत अपने दिल को ।१५*ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी १६*जो तुम आ गए हो तो नूर आ गया है१७*ये माना मेरी जाँ मुहब्बत जवाँ है ।१८*जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा ।२९*मुबारक हो तुमको समां ये सुहाना ।२०*बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा ।
क़ाफिये और रदीफ अपनी मर्ज़ी से ले सकते हैं ग़ज़ल पाँच अशआर से कम न हों!
🌹ग़ज़ल🌹
बहरे मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम
फऊलुन् फऊलुन् फऊलुन् फऊलुन्
वज्न - 122 122 122 122
🌺
कहाँ चल दिए कुछ बतायें ज़रा तो,
कभी चन्द लम्हें बितायें जरा तो।
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तुम्हें कौन रोके बडे दिलनशीं हो ,
कभी अक्स अपना दिखायें ज़रा तो।
🌺
शिकायत यही थी हिमाकत समझ लो,
यही इश्क हमको सिखायें ज़रा तो।
🌺
जताया यही प्यार तुमने कभी ना,
कभी गीत ये गुनगुनाएँ ज़रा तो।
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तुम्हे भूल जाये न दिल को गवाँरा,
किसी रोज तशरीफ़ लायें ज़रा तो।
🌺
न खोलो यहाँ राज अविराज दिल के,
कभी ख्वाब में ही बुलायें ज़रा तो।
🌺
✍ अरविन्द चास्टा अविराजकपासन ,चित्तौरगढ़ ,राज.
१*तेरे प्यार का आसरा चाहता हूं ।
२*वो जब याद आये बहुत याद आये।
३*उठेगी तुम्हारी नज़र धीरे-धीरे ।
४*इशारों-इशारों में दिल लेने वाले ।
५*तुम्हें प्यार करते हैं करते रहेंगे ।
६*अकेले अकेले कहाँ जा रहे हो ।
७*न तुम बे-वफ़ा हो न हम बे-वफ़ा है ।
८*हमीं से मुहब्बत हमीं से लड़ाई
९ *मुझे दुनिया वालों, शराबी न समझो
१०*सितारों के आगे जहां और भी हैं ।
११*ये महलों ये तख्तों ये ताजों की दुनियां
१२*मुझे प्यार की ज़िंदगी देने वाले ।
१३*मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोए ।
१४*संभाला है मैंने बहुत अपने दिल को ।
१५*ये दौलत भी ले लो ये शोहरत भी
१६*जो तुम आ गए हो तो नूर आ गया है
१७*ये माना मेरी जाँ मुहब्बत जवाँ है ।
१८*जो वादा किया वो निभाना पड़ेगा ।
२९*मुबारक हो तुमको समां ये सुहाना ।
२०*बने चाहे दुश्मन जमाना हमारा ।
क़ाफिये और रदीफ
अपनी मर्ज़ी से ले सकते हैं
ग़ज़ल पाँच अशआर से कम न हों!
🌹ग़ज़ल🌹
बहरे मुतक़ारिब मुसम्मन सालिम
फऊलुन् फऊलुन् फऊलुन् फऊलुन्
वज्न - 122 122 122 122
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कहाँ चल दिए कुछ बतायें ज़रा तो,
कभी चन्द लम्हें बितायें जरा तो।
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तुम्हें कौन रोके बडे दिलनशीं हो ,
कभी अक्स अपना दिखायें ज़रा तो।
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शिकायत यही थी हिमाकत समझ लो,
यही इश्क हमको सिखायें ज़रा तो।
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जताया यही प्यार तुमने कभी ना,
कभी गीत ये गुनगुनाएँ ज़रा तो।
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तुम्हे भूल जाये न दिल को गवाँरा,
किसी रोज तशरीफ़ लायें ज़रा तो।
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न खोलो यहाँ राज अविराज दिल के,
कभी ख्वाब में ही बुलायें ज़रा तो।
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✍ अरविन्द चास्टा अविराज
कपासन ,चित्तौरगढ़ ,राज.
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